अल्मोड़ा के सोबन सिंह जीन विश्वविद्यालय में आज से योग साधना पद्धति का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक आधार और चिकित्सकीय महत्व विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में योग विशेषज्ञ डॉ महेंद्र माहरा ने कहा कि सरकार योग को महत्व दे रही है, आज विद्यार्थी योग के महत्व को समझ कर आगे आ रहे हैं और अन्य विद्यार्थियों तक अधिक से अधिक जानकारी पहुंचानी होगी।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोपफेसर एनएस भंडारी ने कहा कि कार्यशाला में योग साधना पद्धतियों का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक आधार तीन विषय रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि योग विज्ञान विभाग चिकित्सकीय, वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व को सिद्ध करने के लिए कार्य कर रहा है। उन्हांेने कहा कि कोरोना के समय से योग चिकित्सा पद्धति की एक वैश्विक पहचान बनी है। योग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ नवीन चन्द्र भट्ट ने कहा कि कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों की ओर से योग के विभिन्न आयामों को लेकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में आसन और प्राणायाम को ही योग समझा जाता है, जबकि योग साधना के मौन व्रत, जप-तप, ध्यान प्राणायाम, किस तरह से मनुष्य को प्रभावित करते हैं।















