मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने जंगलों को आग से बचाने के लिए पिरुल के निस्तारण और अन्य उपयोगों के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने देहरादून में कहा कि प्रदेश में जंगलों की आग का मुख्य कारण पिरूल है, जिसके कारण हर साल अनमोल वन संपत्ति का नुकसान हो रहा है।
डॉ. संधु ने कहा कि पिरुल के निस्तारण के बाद जंगलों की आग की संभावनाओं को कम किया जाने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे क्षेत्रीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को पिरुल के विभिन्न क्षेत्रों में कमर्शियल प्रयोग की संभावनाओं को तलाशे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने पिरुल के प्रयोगों की अन्य संभावनाओं को तलाशे जाने के लिए एक्सपर्ट्स या किसी इंस्टीट्यूशन को लगाए जाने के भी निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि पिरुल के ब्रिकेट कोयले के सब्सिट्यूट के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके प्लांट्स राज्य में हाई-वे के आसपास बनाए जाएं ताकि सप्लाई में आसानी हो। साथ ही, ब्रिकेट्स की मार्केटिंग के लिए थर्मल पॉवर प्लांट्स से संपर्क स्थापित किया जाए। मुख्य सचिव ने पूर्व में संचालित पिरुल से बिजली बनाए जाने वाले प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता की जांच किए जाने के भी निर्देश दिए।
















