राज्यपाल Lt Gen Gurmit Singh ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए प्रकृति संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है, इसके लिए जन चेतना और लोगों का जागरूक होना आवश्यक है। आज देहरादून स्थित राजभवन में ‘‘प्रकृति व संस्कृति के संरक्षण में संतों का योगदान’’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में राज्यपाल ने कहा कि भारत में प्रकृति और संस्कृति का समन्वय है और यह समन्वय भारत की महान संत परम्परा के कारण ही है। उन्होंने कहा कि महान महापुरुषों ने प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दिया है जिसे हमें आत्मसात करना चाहिए। श्री सिंह ने कहा कि हमें अपना अस्तित्व बचाने के लिए प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन की जिम्मेदारी लेनी होगी। राज्यपाल ने आशा व्यक्त की कि अहिंसा विश्व भारती के माध्यम से पूरी दुनिया में प्रकृति व संस्कृति की रक्षा के साथ-साथ अहिंसा, शांति और सद्भावना का संदेश प्रसारित होगा। इस अवसर पर राज्यपाल ने ‘‘एंबेसडर ऑफ पीस’’ पुस्तक और विश्व शांति केन्द्र की विवरणिका का अनावरण किया। साथ ही उन्होंने Swami Ramdev को ‘‘अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा पुरस्कार-2022’’ से भी सम्मानित किया।
कार्यक्रम में योगगुरू स्वामी रामदेव, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती और महामंडलेश्वर स्वामी अद्वैतानंद ने अपने-अपने विचार रखते हुए कहा कि विश्व शांति व सद्भावना स्थापित करने के लिए आचार्य लोकेश के समर्पण और उनकी निष्ठा प्रशंसनीय है।
आचार्य डॉ लोकेश ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्राचीनतम एवं महान संस्कृति है, सर्वधर्म समभाव जिसका मूल मंत्र है, भारतीय होने के नाते अपने देश की महान संस्कृति एवं वसुधेव कुटुंबकम के संदेश को विश्व भर में फैलाना गौरव का विषय है।















